हमने स्वीकार कर लिया, तुम्हें स्वीकार नही।
कोई तेरा ही हमशक्ल है जो सोने नहीं देता…!
बस बदले में एक इंसान की सच्चाई मिलनी मुश्किल थी।
तो फिर इस बीमारी की दवा क्यों नहीं मिलती?
झूठी दुनिया और झूठे लोगों के बीच निभ नहीं पाता।
और दिल में दर्द की लहरें— एक-एक कर उठती रहीं।
नसीब में ही खुशियां ना लिखी हो तो क्या करू…!
जैसे सपना टूटा हुआ और बिखरा सा लगता है।
बहुत उदास करती हैं मुझको निशानियाँ तेरी.
पर वो तारा नहीं टूटता ,जिसे देखकर तुम्हें मांग लूँ
जब पिंजरे से प्यार हुआ, तो रिहाई का वक्त आ पोहोंचा…!
किसी के पास यकीन Sad Shayari in Hindi का कोई इक्का हो तो बताना,
इन ज़ख़्मों से, इन सवालों से बहुत दूर हो जाऊँ…
और फिर बस यादें ही बोझ बनकर रह जाती हैं।